ऑनलाइन शिक्षण ने छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन को कैसे प्रभावित किया है? How has online learning affected the academic performance of students?

हाल के वर्षों में, खासकर कोरोना महामारी के समय से ऑनलाइन शिक्षण(online learning) प्लेटफार्मों के उद्भव के कारण शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आया है। पारंपरिक कक्षा सेटअप ने आभासी कक्षाओं, वेबिनार और डिजिटल संसाधनों का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इस बदलाव ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है की ऑनलाइन शिक्षण ने छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन को कैसे प्रभावित किया है? इस लेख में, हम ऑनलाइन सीखने के फायदे और चुनौतियों दोनों पर चर्चा करते हुए इस विषय के विभिन्न आयामों पर चर्चा करेंगे।

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ऑनलाइन लर्निंग क्या है?(What is online learning?)ऑनलाइन लर्निंग एक शिक्षा प्रक्रिया है जिसमें शिक्षा और शिक्षा सामग्री इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त की जाती है, बिना विद्यालय या शिक्षक के बगैर। यह एक डिजिटल प्रक्रिया होती है जिसमें वीडियो लेक्चर्स, ऑनलाइन पाठ, डिजिटल पुस्तकें, टेस्ट, और अन्य विभिन्न शिक्षा साधने का उपयोग किया जाता है।

ऑनलाइन शिक्षा का उदय:- प्रौद्योगिकी में विकास के कारण ऑनलाइन शिक्षा का काफी विस्तार हुआ है और सभी उम्र के छात्रों को मिलने वाली सुविधा के कारण हाल के वर्षों में ऑनलाइन शिक्षा की लोकप्रियता बढ़ी है।

ऑनलाइन शिक्षा के फायदे(Benefits of online education): –

 

1.लचीलापन और पहुंच(Flexibility and accessibility): – ऑनलाइन(online) सीखने का एक प्राथमिक लाभ इसके द्वारा प्रदान किया जाने वाला लचीलापन है। छात्र विभिन्न शिक्षण शैलियों और शेड्यूल को समायोजित करते हुए, अपनी गति से पाठ्यक्रम सामग्री और व्याख्यान तक पहुंच सकते हैं।

2.भौगोलिक सीमाओं को तोड़ना(breaking geographical boundaries): – ऑनलाइन शिक्षा भौगोलिक सीमाओं को पार करती है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा वैश्विक दर्शकों के लिए सुलभ हो जाती है। यह समावेशिता उन छात्रों के लिए गेम-चेंजर रही है, जिन्हें पहले शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच में सीमाओं का सामना करना पड़ता था।

3.आत्म-अनुशासन(self-discipline): – ऑनलाइन वातावरण आत्म-अनुशासन विकसित करता है क्योंकि छात्र पढ़ाई से ध्यान बँटाने वाली वस्‍तु, एकाग्रता भंग करनेवाली वस्तु का विरोध करना और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना सीखते हैं।

4.व्यक्तिगत शिक्षण पथ(Individual Learning Path): – ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म व्यक्तिगत शिक्षण शैलियों को अपना सकते हैं, अनुकूलित सामग्री और मूल्यांकन प्रदान कर सकते हैं जो प्रत्येक छात्र की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

ऑनलाइन शिक्षा के नुकसान (Disadvantages of online education): –

ऑनलाइन शिक्षण ने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण लोकप्रियता हासिल की है, जो शिक्षार्थियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए लचीलापन और पहुंच प्रदान करता है। हालाँकि, किसी भी शैक्षिक दृष्टिकोण की तरह, इसके अपने कुछ नुकसान भी हैं।

1.सामाजिक मेलजोल का अभाव(lack of social interaction): – पारंपरिक कक्षाएँ छात्रों के बीच सामाजिक मेलजोल, टीम वर्क और नेटवर्किंग को बढ़ावा देती हैं। ऑनलाइन सीखने में अक्सर इन अवसरों का अभाव होता है, जिससे संभावित रूप से छात्रों की रिश्ते और पेशेवर संबंध बनाने की क्षमता सीमित हो जाती है।

2.सीमित व्यक्तिगत ध्यान(limited personal attention): – पारंपरिक कक्षाओं में, शिक्षक छात्रों को तत्काल प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सहायता प्रदान कर सकते हैं। इसके विपरीत, ऑनलाइन शिक्षण अक्सर अतुल्यकालिक संचार पर निर्भर करता है, जिससे कठिनाइयों का सामना करने पर छात्रों के लिए समय पर सहायता प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

3.तकनीकी चुनौतियाँ(Technical Challenges): – ऑनलाइन शिक्षण इंटरनेट एक्सेस, कंप्यूटर और सॉफ़्टवेयर सहित तकनीकी पर बहुत अधिक निर्भर करता है। जिन छात्रों के पास विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्शन या उपयुक्त उपकरणों की कमी है, उन्हें पाठ्यक्रम सामग्री तक पहुँचने और आभासी कक्षाओं में भाग लेने में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

4.आत्म-प्रेरणा और अनुशासन की कमी(Lack of self-motivation and discipline): – जबकि ऑनलाइन शिक्षण लचीलापन प्रदान करता है, यह उच्च स्तर की आत्म-प्रेरणा और अनुशासन की भी मांग करता है। कुछ छात्रों को अपने समय को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में कठिनाई हो सकती है।

5.सीमित व्यावहारिक शिक्षा(limited practical education): – कुछ विषयों में व्यावहारिक अनुभव और व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, जिसे ऑनलाइन वातावरण में दोहराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आभासी शिक्षा की सीमाओं से प्रयोगशाला विज्ञान, कला और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।

6.तकनीक ज्ञान की कमी(lack of technical knowledge): – ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म और उपकरण जटिल हो सकते हैं, जिससे छात्रों को विभिन्न प्रकार के सॉफ़्टवेयर अनुप्रयोगों को नेविगेट करने की आवश्यकता होती है। जो लोग कम तकनीक-प्रेमी हैं, उनके लिए डिजिटल शिक्षण वातावरण को अपनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

7.मूल्यांकन की चुनौतियाँ(Challenges of evaluation): – ऑनलाइन मूल्यांकन में सुरक्षा और शैक्षणिक अखंडता से संबंधित मुद्दों का सामना करना पड़ सकता है। अनुशासनाधिकारी(proctor) के अभाव में धोखाधड़ी और साहित्यिक चोरी को रोकना और पता लगाना अधिक कठिन हो सकता है।

8.भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ(Emotional and mental health concerns): – लंबे समय तक अलगाव और ऑनलाइन पाठ्यक्रम का प्रबंधन करने का तनाव छात्रों के भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कुछ शिक्षार्थी अकेलेपन, चिंता या अवसाद की भावनाओं से जूझ सकते हैं।

9.सीमित पाठ्येतर गतिविधियाँ(limited extracurricular activities): – ऑनलाइन छात्र पाठ्येतर गतिविधियों, खेल, क्लबों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से चूक सकते हैं जो पारंपरिक स्कूल अनुभव का एक अभिन्न अंग हैं।

10.स्क्रीन समय पर निर्भरता(dependence on screen time): – ऑनलाइन सीखने से जुड़े अत्यधिक स्क्रीन समय से आंखों पर तनाव, नींद में खलल और शारीरिक गतिविधि में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो समग्र स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं में योगदान करती हैं।

निष्कर्ष: – जबकि ऑनलाइन शिक्षण कई फायदे प्रदान करता है, इसके नुकसानों को स्वीकार करना और उनका समाधान करना आवश्यक है। संस्थानों और शिक्षकों को एक संतुलित शिक्षण वातावरण बनाने का प्रयास करना चाहिए जो सभी छात्रों के लिए सर्वोत्तम संभव शैक्षिक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए इसकी कमियों को कम करते हुए ऑनलाइन शिक्षा के लाभों का लाभ उठाए।

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बच्चों की शिक्षा पर सोशल मीडिया का प्रभाव? Impact of social media on children’s education? – The Knowledge Hub (educationalvip.com)

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