मोबाइल का बच्चों की शिक्षा पर दुष्प्रभाव 2023। Side effects of mobile on children’s education

मोबाइल फोन, मोबाइल एप्लिकेशन, टैबलेट, लैपटॉप, इंटरनेट और अन्य आधुनिक उपकरणों के विकास के कारण आज की दुनिया की अधिक से अधिक चीजें डिजिटल हो रही हैं। जिनका प्रयोग  बच्चों से लेकर बड़े सभी कर रहें हैं।सारा पाठ्यक्रम आजकल डिजिटल हो गया है किसी भी सवाल का जवाब आसानी से मिल जाता है। अत:मोबाइल का ज्यादा प्रयोग बच्चों के लिए नुकसानदायक बनता जा रहा है।

मोबाइल

मोबाइल” का बच्चों की शिक्षा पर दुष्प्रभाव:-

1.बच्चों में अध्ययन के प्रति आलसी दृष्टिकोण:- मोबाइल या डिजिटल का ज्यादा प्रयोग अध्ययन की आदतों में आलसी प्रवर्ति को जन्म दे सकता है, जिससे बच्चों में आलसी दृष्टिकोण का विकास हो रहा है। डिजिटल शिक्षा बच्चों के पढ़ाई के बुनियादी तरीके को भुला रही है । इंटरनेट पर सभी जवाब आसानी से प्राप्त हो जाते हैं, जिससे बच्चों की रचनात्मक क्षमता में कमी आरही है।बच्चे छोटे से छोटे सवाल के जवाब के लिए mobile का प्रयोग करने लगे है।यहाँ तक कि बच्चे अब साधारण समस्याओं और होमवर्क को भी नेट की सहायता से करते हैं।जिससे वो किताबों से दूर होते जा रहे है।
2.बच्चों की सुरक्षा को खतरा:- ऑनलाइन होने का मतलब यह नहीं है कि आपका बच्चा केवल अध्ययन सामग्रियों को ही नेट पर तलाश कर रहा । इसमें बहुत सारी चीजे ऐसी भी  है जो बच्चों के लिए अच्छी नहीं हैं, वह उन तक पहुँच रहे हैं।उनको यह भी पता नहीं है की कोनसी चीजें उनके लिए काम की है और कोनसी नहीं।
3.किताबों से दूर होते बच्चे:- mobile  बच्चों को अपनी गिरफ्त में ऐसे लेता जा रहा है कि बच्चों का मन आजकल किताबों में नहीं लग रहा और वे धीरे-धीरे किताबों से दूर होते जा रहे है।उनका पढ़ाई में मन ही नहीं लगता। हमेशा mobile से चिपके रहने को कोशिश करते है।जब से कोरोना आया है यह समस्या और ज्यादा बढ़ गई है ।  इस प्रकार मोबाइल बच्चों को किताबों से दूर करता जा रहा है।
निष्कर्ष:- इसलिए डिजिटल शिक्षा से फायदा और नुकसान दोनों हैं। जब भी बच्चा ऑनलाइन तकनीक का उपयोग करने जा रहा हों, उस समय माता-पिता और शिक्षकों द्वारा उन्हे ठीक से निर्देशित किया जाना चाहिए।तथा सीमित समय के लिए ही मोबाइल का प्रयोग निश्चित किया जाना चाहिए। ताकि बच्चों को mobile के दुष्प्रभाव से बचाया जा सके| क्योंकि बच्चों को पता नहीं होता की क्या सही है या क्या गलत। mobile के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और बच्चों को जागरूक करना होगा।

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