भारत का आर्थिक विकास एवं चुनौतियाँ{2024}

इस विगत दशकों में भारत का आर्थिक विकास उत्साहवर्द्धक रहा है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में भारत की भागीदारी  8.7% है और आज हमारा देश विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है किन्तु अभी भी यह विश्व में उस स्थान को प्राप्त नहीं कर सका है जिसका यह वास्तव में हकदार है। इसका कारण है-भारत का आर्थिक विकास एवं चुनौतियाँ का अम्बार लगा होना, जो एक कठिन चुनौती बनकर हमारे सामने खड़ा है।
देश के पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. लालबहादुर शास्त्री का भी मानना था कि बिना इन समस्याओं का समाधान किए बिना आर्थिक विकास सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा भी था “आर्थिक मुद्दे हमारे लिए सबसे जरूरी है और यह सबसे महत्वपूर्ण है कि हम अपने सबसे बड़े दुश्मन गरीबी और बेरोज़गारी से लड़े।” जनसंख्या वृद्धि, गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक विषमता, भ्रष्टाचार, नारी-शोषण, सामाजिक शोषण, अशिक्षा, औद्योगीकरण की मन्द प्रक्रिया इत्यादि भारत के आर्थिक विकास के समक्ष मुख्य चुनौतियाँ हैं:
भारत का आर्थिक विकास एवं चुनौतियाँ

भारत का आर्थिक विकास एवं चुनौतियाँ और इनसे निपटने के कारण:

1.जनसंख्या वृद्धि: जनसंख्या वृद्धि हमारे देश के आर्थिक विकास के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती तो है ही, साथ ही बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में रोजगार के अवसर सृजित नहीं होने के कारण बेरोजगारी एवं गरीबी में भी वृद्धि होती है, यही जनसंख्या वृद्धि आगे जाकर अनेक सामाजिया समस्‌याओं एवं बुराइयों की जड़ बनती है। जनसंख्या तो बढ़ती है, किन्तु उस अनुपात में संसाधनों में वृद्धि नहीं हो पाती, जिसके फलस्वरूप सीमित संसाधनों का बंटवारा हमें पहले के मुकाबले अधिक लोगों के साथ करना पड़ता है, नतीजतन हमारा आर्थिक विकास धीमा पड़ जाता है।
2.गरीबी: गरीबी अथवा निर्धनता उस स्थिति को कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन यापन  की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में असमर्थ रहता है। गरीबी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा एवं इसके विकास में अनेक प्रकार की समस्याएँ जन्म लेती हैं। चोरी, अपहरण, हत्या, डकैती, नशाखोरी, बेश्या जैसी बुराइयों की जड़ में कहीं-न-कहीं गरीबी ही है। भारत के करोड़ों लोग अब भी घोर गरीबी की स्थिति में जीने को विवश हैं।
3.बेरोजगारी: भारत के आर्थिक विकास में बेरोजगारी भी एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने है। बेरोजगारी के कारण संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पाता, कुपरिणामस्वरूप देश के आर्थिक विकास को समुचित गति नहीं मिल पाती। बेरोजगारी, एक व्यापक आर्थिक और सामाजिक चुनौती, काम करने की इच्छा के बावजूद नौकरी के बिना रहने की स्थिति को संदर्भित करती है। यह एक बहुआयामी मुद्दा है जिसके व्यक्तियों और समाजों पर दूरगामी परिणाम होंगे। वित्तीय तनाव के अलावा, बेरोज़गारी से निराशा की भावना पैदा हो सकती है, आत्म-सम्मान और मानसिक कल्याण में कमी आ सकती है।
उच्च बेरोज़गारी दर अक्सर आर्थिक अस्थिरता का संकेत देती है और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण बाधाएँ पैदा करती है। बेरोजगारी के कारण अलग-अलग होते हैं, जिनमें तकनीकी बदलाव, आर्थिक मंदी और अपर्याप्त शिक्षा या कौशल सेट जैसे कारक शामिल होते हैं। बेरोजगारी को संबोधित करने के लिए व्यापक रणनीतियों की आवश्यकता है, जिसमें शिक्षा में निवेश, कौशल विकास और एक लचीला और अनुकूलनीय कार्यबल को बढ़ावा देना शामिल है। इस मुद्दे से निपटने से न केवल आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलता है बल्कि समुदायों की समग्र भलाई और स्थिरता में भी योगदान मिलता है।
4.आर्थिक विषमता: भारत की यह अजीब बिडम्बना है कि यहाँ एक ओर तो ऐसे धनकुबेरों की कमी नहीं है जिनके पास अकूत सम्पत्ति है, वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जिनके लिए दो बक्त की रोटी भी नसीब में नहीं है। आर्थिक विषमता की यह स्थिति भारत के आर्थिक विकास में बहुत बड़ी बाधा है।
5.भ्रष्टाचार: भ्रष्टाचार आज की तारीख में आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। कुछ लोग कानूनों की अवहेलन करके अपना उल्लू सीधा करते हुए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। इसकी वजह से जहाँ लोगों का नैतिक एवं धार्मिक पतन हुआ है, वहीं दूसरी और देश को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ी है।
6.नारी-शोषण: हमारे देश का यह दुर्भाग्य रहा है कि यहाँ पूर्व में स्त्री शिक्षा पर बल नहीं दिया जाता था। यहाँ की नारी को चहारदीवारी तक ही सीमित रखा जाता था। उनका शोषण किया जाता था। आज भी इस ‘आधी आबादी’ में से कुछ की स्थिति ही ठीक है, बाकी या तो घर की देखभाल में लगी रहती है। जिसके कारण देश का आर्थिक विकास प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है।
7.सामाजिक शोषण: धनिक वर्ग द्वारा गरीबों का शोषण, उनकी मजबूरी का फायदा उठाना ही सामाजिक शोषण । यदि मजदूरों का शोषण किया जाएगा, उन्हें उचित मज़दूरी नहीं दी जाएगी, तो भला कैसे कोई देश आर्थिक विकास कर सकता है।
8.अशिक्षा: हम चाहे जितने दावे कर लें, लेकिन सच्चाई यही है कि भारत की लगभग 30% आबादी आज भी अशिक्षित है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्थिति और भी चिन्ताजनक है। आज भी लगभग 40% महिलाएँ अशिक्षित हैं। इतनी बड़ी आबादी के अशिक्षित होने से देश का आर्थिक विकास गम्भीर रूप से बाधित होता है।
9.औद्योगीकरण की मन्द प्रक्रिया: भारत की जनसंख्या जिस गति से बढ़ रही है, उसके ययोचित पोषण के लिए, औद्योगीकरण की प्रक्रिया में जिस तीव्रता की आवश्यकता थी, उसे हम आज तक प्राप्त कर पाने में विफल रहे हैं, फलस्वरूप आर्थिक विकास की गति धीमी हुई है।
निष्कर्ष: देश एवं समाज के आर्थिक विकास के लिए इन चुनौतियों का शीघ्र समाधान आवश्यक है और इसका उत्तरदायित्व राजनेताओं अथवा प्रशासनिक अधिकारियों का ही नहीं है, बल्कि इसके लिए संयुक्त प्रयास किए जाने की उवश्यकता है। देशभर में शिक्षा का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार कर एवं यहाँ की जनता द्वारा ‘छोटा परिवार, सुखी कार का आदर्श अपनाकर बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाया जा सकता है। साक्षरता दर को ऊँचा उठाकर, कुटीर उद्योग आदि का विस्तार कर रोज़गार के नए-नए क्षेत्र तलाशे जाने चाहिए।
आर्थिक विषमता को दूर करने हेतु नई नीतियों का गठन किया जाना चाहिए। नारियों को अधिकाधिक संख्या में शिक्षित कर उन्हें रोज़गार से जोड़ा जाना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिण्ट मीडिया को इन सुधार कार्यों में खुलकर सहयोग करने की आवश्यकता है। समाज सुधारकों, लेखकों, कलाकारों एवं अन्य बुद्धिजीवी वर्गों को भी जन-जन से जुड़कर लोगों में नई चेतना का संचार करना चाहिए, ताकि देश में सामाजिक क्रान्ति लाई जा सके। नोबेल पुरस्कार प्राप्त रतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का भी कहना है-“सामाजिक परिवर्तन के विना आर्थिक विकास सम्भव नहीं है।
FAQs: –

1.भारत की आर्थिक वृद्धि में बाधक मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
उत्तर: चुनौतियों में आय असमानता, गरीबी, बुनियादी ढांचे की बाधाएं और नियामक जटिलताएं शामिल हैं।

2. सरकार कृषि संकट और औद्योगिक विकास बाधाओं जैसे मुद्दों को कैसे संबोधित करने की योजना बना रही है?
उत्तर: ‘मेक इन इंडिया’ और कृषि सुधार जैसी सरकारी पहलों का उद्देश्य इन चुनौतियों का समाधान करना है।

3.भारत के आर्थिक विकास में प्रौद्योगिकी की क्या भूमिका है?
उत्तर: डिजिटलीकरण और नवीनता सहित प्रौद्योगिकी, विशेषज्ञता को नए आकार के विकास और आर्थिक विकास को गति देने में सहायक बनी हुई है।

4.भारत के महानुभावों में योगदान देने वाले प्रमुख क्षेत्र कौन हैं और उनके किस नाम से साक्षात्कार हो रहा है?
उत्तर: कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में प्रमुख योगदानकर्ता हैं।